Manager Message

Home » Manager Message

managerप्रिय अभिभावक एवं छात्र / छात्राओं

मुझे आपको यह जानकारी देते हुए हर्ष का अनुभव है की विगत 2007 में स्थापित श्री दर्शन महाविद्यालय औरैया उच्च शिक्षा की दिशा में एक नवीन कदम सिद्ध हुआ है।  यह महाविदयालय औरैया नगर की सीमा में रहते हुए भी नगर के शोर – गुल युक्त वातावरण से मुक्त है यहाँ पूर्ण रूप से वातावरण एवं शांति का माहौल है।  शिक्षापयोगी समस्त आवश्यक दशाएं उपलब्ध हैं। कहा जाता है की शिक्षा के साथ साथ विभिन्न प्रकार जिला स्तरीय / विश्वविद्यालय एवं प्रदेश स्तरीय खेलकूद का भी आयोजन किया जाता है।

शिक्षा मनोविज्ञान का मानना है की प्रत्येक विद्यार्थी का मानसिक स्तर भिन्न भिन्न होता है अतः सभी के मानसिक स्तर के मानक को ध्यान में रखते हुए एक ऐसे स्तर की शिक्षा प्रदान की जाती है जिससे सभी मानसिक स्तर के विद्यार्थी लाभान्वित हो सकें।  पूर्व में नगर और उसके आस पास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए इधर उधर भटकना पड़ता था। इस महाविद्यालय की स्थापना इनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक सफल प्रयास सिद्ध हुआ है।

यह महाविद्यालय आगे चलकर टैगौर के शांति निकेतन की तरह अपने गौरव को प्राप्त करे यह मानसिक धारणा लेकर इस महाविद्यालय की नीवं राखी गई थी और आज वह स्वप्न साकार होता दिखाई दे रहा है मेरी दृष्टि में कक्षाओं में पास हो जाना परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना ही अच्छी शिक्षा का मानक नहीं है बल्कि शिक्षा वह है जिससे छात्र अपने जीवन की एक ऐसी तैयारी कर सके जिससे वह स्वयं विकसित हो और एक आदर्शवादी विकसित समाज की स्थापना कर सके। आज की व्यवसायिक, मानसिक, भ्रष्ट, राजनीति तथा अहिष्णु समाज में भारत की युवा शक्ति को दिशा विहीन ही किया है अतः राष्ट्र प्रांत व जनपद अथवा देश के जान मानस के बीच व्याप्त कुहांसे को दूर करने के लिए देश के युवाओं को शुशिक्षित एवं प्रशिक्षित बनाने की महती आवश्यकता महसूस होती है। मैं अपने क्षेत्र के अभिभावकों एवं छात्र / छात्राओं को इस वेबसाइट के माध्यम से अपने हृदय की सच्ची बात रख रहा हूँ और वह यह कि वर्तमान शिक्षण संस्थाओं की भरमार में सम्मलित रहने का उद्देश्य नहीं है वरन सशक्त काल में वाटिका में हमारी भूमिका तो विरवे को रोपने की रही है। अहम भूमिका तो शिक्षकों (गुरुओं) की है, वह इस वाटिका के कुशल माली हैं। मुझे पूर्ण भरोसा है की अपनी कर्तव्य निष्ठा से, ज्ञान से तथा सदभाव से इस महाविद्यालय को अभिसिंचित इसे हराभरा बनाये रख कर ऐसे सुमनों को विकसित करेंगे जिनकी सुवास महाविद्यालय के परिवेश को ही नहीं अपितु समस्त राष्ट्र को सुवासित कर सकेगी। शिक्षा के उन्नयन और क्षेत्र के शैक्षणिक विकास को समृद्धि बनाये रखने में हमारा यह सपना आप सब के सहयोग से अवश्य साकार हो सकेगा। हम महाविद्यालय परिवार तथा क्षेत्रवासियों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने इस स्वप्न को साकार बनाने में प्रभु से प्रार्थना करते हैं तथा आप सबके सहयोग की हार्दिक अपेक्षा की कामना करते हैं।

रवीन्द्र बाबू द्विवेदी
संस्थापक / प्रबंधक