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दो वर्ष मानवता का

बी. ऐड. कहने के लिए एक शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स है लेकिन वह हमें शिक्षक होने के सही मायने सिखाता है। एक शिक्षक का बच्चे के प्रति उत्तरदायित्व शायद उसके माता पिता से भी कहीं ज्यादा होता है। चूँकि बालक विद्यालय में सिर्फ शिक्षा ग्रहण नहीं करता बल्कि अपने शिक्षकों से जीवन के नैतिक मूल्यों को भी ग्रहण करता है।
ये अपने नैतिक मूल्य उसे अपने समाज की प्रगति की ओर अग्रसर करता है। बालक द्वारा दिया गया विद्यालय में दो वर्ष, उसके अंदर छिपी हुई जन्मजात शक्तियों को विकसित करने में सक्षम है। शिक्षक द्वारा दिया गया दार्शनिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, ऐतिहासिक तथा तकनीकी शिक्षा का ज्ञान बालक की शक्तियों को पहचानने में मदद करता है। जिससे बालक अपना बहुमुखी विकास करने में सक्षम बनता है। जब तक भारत का प्रत्येक नागरिक अपनी क्षमताओं को स्वयं नही पहचानेगा तब तक भारत देश को विकसित देशों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकेगा।
यह जरुरी नहीं की बी. ऐड. जैसा शिक्षक – प्रशिक्षक कोर्स करने के बाद प्रत्येक नागरिक विद्यालय में ही शिक्षण, प्रशिक्षण कार्य करे वह समाज में रहकर समाजरूपी कक्षा को नैतिकता और सामाजिकता का पाठ पढ़ाते हुए उसे दिन – प्रतिदिन सही दिशा की ओर अग्रसर करते हुए उसे नित्य नए आयामों तक पहुंचाए और उसे विश्व के सबसे अग्रणी देश बनाने में अपनी भूमिका स्पष्ट कर अपने मानवीय धर्म का पालन करें।

अनुराग अवस्थी
प्रभारी – बी. ऐड. विभाग